बच्चे जो बड़े हो गए !

By mahabalishaka

बच्चे जो बड़े हो गए !
जीवन की अभिव्यक्ति को,
जठारानल की तृप्ति को,
अपने पैरो पे खडे हो गए ! 

बचपन क्या, मनमानी क्या ?
पढ़ने में आनाकानी क्या ?
कहाँ कथाएं परियों की,
दादी क्या और नानी क्या ?
स्वप्न-लोक के द्वार को छूने,
सड़क पे पड़े-पड़े सो गए !
बच्चे जो बड़े हो गए !

शोक नहीं,मुस्कान नहीं,
भावुकता का ज्ञान नहीं !
निरुद्देश्य जीवन के पथ पे
चले शरीर, पर प्राण नहीं !
वृहद् सृष्टि के, सुक्ष्म पलों में
भाव-विहीन गड़े खो गए !
बच्चे जो बड़े हो गए !

3 Responses to “बच्चे जो बड़े हो गए !”

  1. Manish Says:

    bahut utkrisht kavitayen hain mahabali. Keep it up rahega humari taraf se

  2. Priyank Says:

    Humko naa aata hai itnaa accha hindi likhnaa :(

  3. Julez Says:

    Bahut khoob…
    Kya likhte ho boss!!!

    Keep writing….

    Cheerz

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